Bipasha basu daughter heart surgery : बिपाशा बसु की बेटी के दिल में 2 छेद 3 महीने की उम्र में हुई थी ओपन सर्जरी डॉक्टर से जानें क्या है दिल का छेद.

Bipasha basu daughter heart surgery : बॉलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा करके अपने फैन्स को शॉक में डाल दिया। नेहा धूपिया के साथ इंट्राग्राम लाइव के दौरान उसने बताया की उनके बेटी देवी दिल में दो छेद के साथ पैदा हुई थी और महज 3 महीने की उम्र में ही उनकी ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ी थी। 6 घंटे की सक्सेसफुल सर्जरी के बाद डॉक्टर उनकी बेटी की इस हार्ट कंडीशन को ठीक कर पाए। दरअसल 12 नवंबर 2022 को जन्मी बिपाशा और करन सिंह ग्रोवर की बेटी देवी के दिल में दो छेद (Two hole in heart) थे और डॉक्टर ने इस बीमारी का नाम वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) बताया था।

वीएसडी बीमारी जेनेटिक है और इसके साथ कोई भी बच्चा पैदा हो सकता है। इसलिए जरूरी है, इस बीमारी के बारे में पर्याप्त व उचित जानकारी का होना। इसलिए हमने इस बीमारी के बारे में कई अलग-अलग डॉक्टर्स से बात की जिनके इनपुट नीचे लेख में दिए गए हैं। हालांकि, बताते चलें कि वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) को जन्मजात हृदय दोष भी कहा जाता है। यह शिशुओं में जन्म के समय ही होने वाली एक खतरनाक बीमारी है, इसमें सेप्टम में एक छेद होता है, जो दिल के दो नीचे वाले चैंबर्स को अलग करता है। हालांकि अगर छोटा वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट है तब कोई समस्या नहीं होती है लेकिन यदि यह छेद बड़ा है तो उसको सही करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट के कारण
कोलकाता के आरएन टैगोर अस्पताल में सलाहकार बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर देबब्रत नंदी ने कहा कि छोटे बच्चों में जन्म से पहले ही उसके दाएं और बाएं निलय अलग नहीं होते, परन्तु जब गर्भ में बच्चे का बड़ा हो रहा होता है तो एक दीवार इन दो वेंट्रिकल्स को अलग करती है और यदि यह दीवार पूरी तरह से नहीं बनती तब एक छेद रह जाता है, यह छेद छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी, यह छेद एक से ज्यादा भी हो सकता है। यदि इसके कारणों की बात की जाए तो अभी तक इसकी कोई खास जानकारी नहीं पता चली है। वहीं बड़ों में निलयी वंशीय दोष बहुत ही दुर्लभ है पर उससे दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है।
वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट के बारे में कैसे पता चलता है?
डॉ. देबब्रत नंदी ने इसके बारे पता लगाने और रोकथाम को लेकर बताया कि इसके बारे में बच्चे के जन्म के बाद आपके डॉक्टर इनके लक्षणों को नोटिस कर सकते हैं। कई बार शिशु के जन्म से पहले अल्ट्रासाउंड की मदद से भी इस डिफेक्ट का पता चल जाता है और कई बार बड़े होने पर भी इस रोग का पता नहीं चल पाता। इसके अलावा कुछ लक्षणों को दिखाई पड़ने पर तुरंत जाच कराना चाहिए जैसे- भूख न लगना, विकास में परेशानी, तेज सांस लेना या सांस फूलना, जल्दी थक जाना, वजन का न बढ़ना, तेजी से सांस लेना या सांस का न आना, असामान्य हार्टबीट, थक जाना या कमजोरी इसके लक्षण हैं और यदि ये पता चले तो तुरंत जांच एवं इलाज कराना चाहिए। इसके लिए कुछ जांच की जाती है जैसे- कार्डियक कैथीटेराइजेशन, चेस्ट एक्स-रे, ECG, इकोकार्डियोग्राम, दिल का MRI करके इसके बारे में पता लगाया जा सकता है।
डॉ देबासिस दास, सीनियर कंसल्टेंट, कार्डिएक सर्जन, नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, हावड़ा, कोलकाता ने सीएचडी के निदान को लेकर बताया कि गर्भावस्था के दौरान सीएचडी का निदान एक विशेष प्रकार के अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके किया जा सकता है, जिसे गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद भ्रूण इकोकार्डियोग्राम कहा जाता है, जो विकासशील बच्चे के दिल की अल्ट्रासाउंड तस्वीरें बनाता है। हालाँकि, कुछ सीएचडी का पता जन्म के बाद या जीवन में बाद में बचपन या वयस्कता के दौरान नहीं लगाया जाता है। यदि किसी को संदेह है कि सीएचडी मौजूद हो सकता है, तो इसकी जांच के लिए बच्चे के कई परीक्षण (जैसे इकोकार्डियोग्राम) करवा सकते हैं। बाल हृदय रोग विशेषज्ञ वे डॉक्टर हैं जो सीएचडी के निदान की पुष्टि करने के लिए एक विस्तृत इकोकार्डियोग्राम और आवश्यकतानुसार आगे के परीक्षण करेंगे।
क्या इसकी रोकथाम की जा सकती है
इसके ज्यादातर मामलों में, आप निलयी वंशीय दोष से छुटकारा पाने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं। हालांकि, स्वस्थ रहने के लिए हर संभव प्रयास करना बहुत जरूरी है। इसके लिए कुछ सावधानियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिनमें निम्न हैं –

1. गर्भवती होने से पहले ही जांच करवा लें: यदि आप गर्भवती हैं तो उस समय डॉक्टर से नियमित जांच करवाते रहें और अगर आपको डॉक्टर कुछ सलाह दें तो उसे जरूर करें। यही नहीं, आपकी इसके लिए जरूरी दवाइयों के लिए भी जान लेना चाहिए।

यह भी पढ़े   OMG 2 New Poster : भगवान 'शिव' बने अक्षय कुमार की फिल्म का नया पोस्टर.

2. संतुलित आहार लें: अपने आहार में विटामिन सप्लीमेंट जरूर लें जिसमें फोलिक एसिड भी शामिल हो इस प्रकार के आहार जरूर लें, इसके अलावा कैफीन की मात्रा को सीमित रखें।

3. नियमित व्यायाम करें: अपने डॉक्टर से मिल कर एक्सरसाइज को समझलें और उसी के अनुसार नियमित व्यायाम जरूर करें।

इसके अलावा आप उन चीजों को लेने से बचें जो आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो, आप अल्कोहल, तम्बाकू और अन्य हानिकारक चीजों से दूर रहें। गर्भवती होने से पहले समय पर सभी टीके लगवाए। कुछ संक्रमण भ्रूण के विकास के लिए हानिकारक हो सकते हैं, मधुमेह को नियंत्रण में रखें और कुछ भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

वेंट्रिकुलर सेप्टल दोष के लिए उपचार का मुख्य रूप सर्जरी है, जो अलग अलग उम्र के हिसाब से अलग अलग लोगों के लिए निर्धारित की जाती है, जैसे- ओपन हार्ट सर्जरी, कैथेटर प्रक्रिया, हाइब्रिड प्रक्रिया की जाती है। इसके अलावा कुछ दवाइयां भी दी जाती हैं, जिससे मरीज जल्द ठीक हो पाता है।