Coal Production : कोयला उत्पादन में फिलहाल नहीं होगी कटौती अगले 7 साल में 50 प्रतिशत बढ़ेगा कोल प्रोडक्शन.

 Coal Production  : अगले महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाली काप-28 की बैठक में कोयला के इस्तेमाल को लेकर भारत का रुख थोड़ा बदला हुआ होगा। भारत साफ तौर पर इस बैठक में यह कहने वाला है कि कोयला उत्पादन में कटौती करने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करने वाला।

देश में बिजली की मांग में तेज वृद्धि को देखते हुए भारत कम से कम 10-15 वर्षों तक कोयले का उत्पादन बढ़ाने वाला है। कोयला मंत्रालय की योजना वर्ष 2027 तक देश में 140 करोड़ टन और वर्ष 2030 तक 157.7 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने की है। वर्ष 2023 में कोयला उत्पादन तकरीबन सौ करोड़ टन रहने की संभावना है।

अगले 7 साल में 50% कोयला उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
साफ है कि भारत अगले सात वर्षों में कोयला उत्पादन 50 फीसद बढ़ाने जा रहा है। पर्यावरण सुरक्षा पर भावी रणनीति को लेकर यूएई की बैठक को लेकर भारत की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पिछले दिनों केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने राज्यों के बिजली मंत्रियों की बैठक में भारत के भावी रूख का संकेत दे दिया था।

भारत को अपनी आर्थिक विकास दर को बनाये रखने के लिए ताप बिजली संयंत्रों की क्षमता को बढ़ाना होगा। अभी तक माना जा रहा था कि भारत सरकार 25 हजार मेगावाट क्षमता के नये ताप बिजली संयंत्र लगाने पर विचार कर रहा है। आर के सिंह, केंद्रीय बिजली मंत्री

बिजली मंत्री ने स्पष्ट किया है कि नये ताप बिजली संयंत्रों की क्षमता 80 हजार मेगावाट हो सकती है। इसके बाद उन्होंने कोयला खदान वाले राज्यों से कहा है कि वह नये संयंत्रों की योजना बनायें। साफ है कि भारत ताप बिजली संयत्र लगाने को लेकर विकसित देशों के दबाव में आने वाला नहीं है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने बताया गया है कि बिजली मंत्रालय की तरफ से 80 हजार मेगावाट क्षमता की नई योजना लगाने की तैयारी को देखते हुए कोयला का उत्पादन बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है।

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अगर ये प्लांट 85 फीसद क्षमता के मुताबिक काम करती हैं तो हमें सालाना 40 करोड़ टन कोयले की जरूरत होगी। इसके लिए नए कोयला खदान में खुदाई के साथ ही मौजूदा खदानों में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी करनी होगी।

चालू साल के आंकड़े बताते हैं कि ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की मांग 8.99 फीसद की रफ्तार से बढ़ी है जबकि कोयला उत्पादन 13 फीसद से भी ज्यादा का हुआ है। बिजली की मांग में अगस्त से अक्टूबर के दौरान 20 फीसद की वृद्धि होने के बावजूद कोयले की दिक्कत नहीं हुई है।