PM e-Bus Sewa: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 100 शहरों में चलेंगी 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें

मोदी कैबिनेट की बुधवार को बैठक हुई. मीटिंग में मोदी मंत्रिमंडल ने देश में ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया. सरकार ने देश के 100 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया है. इसके लिए सरकार 57 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी.

देश में परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 100 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का फैसला लिया है. मोदी कैबिनेट ने इसके लिए 57 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इसके तहत देशभर में 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी

अनुराग ठाकुर ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में आज (बुधवार) केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई. मीटिंग में पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दे दी गई है. इस पर 57,613 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. देशभर में लगभग 10,000 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी. अनुराग ठाकुर ने कहा, 57,613 करोड़ में से 20,000 करोड़ केंद्र सरकार देगी. इस योजना में 3 लाख और उससे ज्यादा की जनसंख्या वाले शहरों को कवर किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 10 हजार नई इलेक्ट्रिक बसों PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत चलाई जाएंगी.

अनुराग ठाकुर ने कहा कि पुरानी बसों के स्क्रैप के लिए अतिरिक्त बसें उन शहरों को दी जाएंगी. ये योजना दस साल तक चलेगी. इस स्कीम से शहरों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. अनुराग ठाकुर के मुताबिक, योजना में उन शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां व्यवस्थित परिवहन सेवा की कमी है. अनुराग ठाकुर ने बताया कि देश में 3 लाख से 40 लाख की आबादी वाले 169 शहर हैं और इस कार्यक्रम के लिए इनमें से चैलेंज मोड के आधार पर 100 शहरों का चयन किया जाएगा. ई-बसें सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत इन चुने गए शहरों में परिचालित की जाएंगी.

यह भी पढ़े   LPG Subsidy : एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी में होगी बढ़ोतरी.

रेलवे की सात मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी
इसके अलावा सरकार ने रेलवे की 7 मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दे दी. इस पर करीब 32,500 करोड़ रूपये का खर्च आएगा. रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में 2339 किलोमीटर जोड़ा जा सकेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, पीएम मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

देश के 9 राज्यों के 35 शहरों से जुड़ी इस परियोजना से रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में 2339 किलोमीटर जोड़ा जा सकेगा. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.