Dgca Refused : DGCA ने अकासा एयर और पायलटों के विवाद में हस्तक्षेप से किया इनकार एयरलाइन ने रेगुलेटर पर लगाया था निष्क्रियता का आरोप.

Dgca Refused : भारत सरकार के विमानन अधिकारियों ने अकासा एयर (Akasa Air) और उसके पायलटों के बीच विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। यह बात एक कानूनी फाइलिंग से सामने आई है। अकासा एयर ने नियामकों पर पूरा मामले पर निष्क्रियता का आरोप लगाया था। यह पूरा मामला अकासा एयर के पायलटों की तरफ से बिना नोटिस पीरियड दिए ही अचानक से नौकरी छोड़ने के बाद शुरू हुआ है।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंची अकासा एयर

अकासा एयर इन पायलटों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई है। एयरलाइन ने सभी पायलटों के खिलाफ करोड़ रुपयों के मुआवजे का दावा किया है। इसके अलावा अकासा एयर ने पायलटों की इस हरकत से निपटने के लिए अनुरोध पर कार्रवाई ना करने के लिए भारतीय अधिकारियों को भी अदालत में चुनौती दी है। इस क्राइसिस की वजह से एयरलाइन ने ऑपरेशन बंद करने की चेतावनी भी दी है।

पायलटों के लिए कितना है नोटिस पीरियड

भारत में पायलटों के लिए 6 से 12 महीनों का नोटिस परियड देना अनिवार्य है। कुछ पायलट संगठनों की तरफ से इस नियम को अदालत में चुनौती भी दी गई है। अकासा का यह कहना है कि उनके कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दाइत्वों का पायलटों को पालन करना होगा। सात ही अकासा एयर सार्वजनिक हित में हस्तक्षेप ना करने के लिए अधिकारियों पर मुकदमा कर रहा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और विमानन मंत्रालय ने 22 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में कहा कि अकासा की याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि नियामक इस मामले में हस्तक्षेप करने में असमर्थ है।

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इस वजह से DGCA ने नहीं किया हस्तक्षेप

DGCA ने कहा है कि उसके पास किसी भी कॉन्ट्रैक्ट में हस्तक्षेप करने की कोई भी शक्ति या अधिकार नहीं है। अकासा ने नई फाइलिंग पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। अकासा ने डीजीसीए पर कोई भी कार्रवाई करने में अनिच्छुक होने का आरोप लगाया है। अकासा के अनुसार, पायलट के इस्तीफे की वजह से अगस्त में 632 उड़ानें रद्द की गईं।